महाड सत्याग्रह सामाजिक समानता और मानव अधिकारों की ऐतिहासिक क्रांति तथा बाबा साहेब डॉ आंबेडकर के विरुद्ध दर्ज हुए मुकदमे
महाड सत्याग्रह सामाजिक समानता और मानव अधिकारों की ऐतिहासिक क्रांति तथा बाबा साहेब डॉ आंबेडकर के विरुद्ध दर्ज हुए मुकदमे भारत का सामाजिक इतिहास केवल राजनीतिक स्वतंत्रता के संघर्ष तक सीमित नहीं रहा , बल्कि यह सामाजिक न्याय और समानता के लिए किए गए आंदोलनों से भी गहराई से जुड़ा हुआ है। भारतीय समाज में सदियों तक चली जाति-व्यवस्था और छुआछूत ने समाज के एक बड़े वर्ग (1931 की जनगणना के अनुसार भारत में अछूतों की संख्या लगभग 35 करोड़ के आसपास रही होगी ) को मूलभूत अधिकारों से वंचित रखा। इन्हीं अन्यायपूर्ण परिस्थितियों के विरुद्ध जो आंदोलन हुए , उनमें महाड सत्याग्रह एक अत्यंत महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक आंदोलन माना जाता है। बीसवीं शताब्दी के प्रारम्भिक काल में भारतीय समाज गहरे सामाजिक भेदभाव से ग्रस्त था। दलित या तथाकथित “ अस्पृश्य ” वर्ग को समाज के निम्नतम स्तर पर रखा जाता था। उन्हें मंदिरों में प्रवेश नहीं मिलता था , सार्वजनिक कुओं और तालाबों से पानी लेने की अनुमति नहीं थी , और कई स्थानों पर उन्हें सड़क पर भी अलग चलना पड़ता था। यह स्थिति मानवाधिकारों के मूल सिद्धांतों के विरुद्ध थी। यह सत...