सामाजिक एकता का भ्रम और दलित समाज की चेतावनी

जब किसी गैर-दलित या सवर्ण पर प्रशासनिक अन्याय होता है, तो पूरा समाज एकजुट हो जाता है और उस भीड़ में सबसे बड़ी संख्या दलित वर्ग की होती है। लेकिन जब यही अन्याय किसी दलित पर होता है, तो वही गैर-दलित समाज मूकदर्शक बन जाता है और उसे कभी आंदोलन का रूप नहीं देता। दलित समाज को अब यह ढोंग बंद करना होगा। यदि संकट में वे आपके साथ खड़े नहीं होते, तो प्रशासनिक स्तर पर होने वाले उनके किसी भी आंदोलन या भेदभाव में उनका साथ देना तुरंत बंद करें। अपनी शक्ति और एकजुटता को केवल अपनों के स्वाभिमान के लिए आरक्षित रखें और अपने समाज अर्थात गैर दलितों के साथ हो रहे भेदभाव के साथ ही खड़े रहे।

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